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डिण्डौरी के शहपुरा में नववर्ष में अन्नदाता किसान भूख हड़ताल पर मजबूर, सरकार और प्रशासन पर अनदेखी के आरोप

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भारतीय किसान संघ के बैनर तले 5 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ दो दिनों से जारी है क्रमिक भूख हड़ताल 

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुशांगिक संगठन है भारतीय किसान संघ 

 

बलराम राजपूत न्यूज डिण्डौरी

जहां एक ओर मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी बाहुल्य जिला डिण्डौरी में किसान नए वर्ष की शुरुआत भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं। यहां वीरांगना रानी दुर्गावती स्टेडियम शहपुरा में भारतीय किसान संघ डिण्डौरी के बैनर तले किसान लगातार 5 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ दो दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनकी मूलभूत समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ के बैनर तले डिण्डौरी जिले के हजारों किसान 29 दिसंबर 2025 से वीरांगना रानी दुर्गावती स्टेडियम, शहपुरा में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। हड़ताल के चौथे दिन, 1 जनवरी 2026 से किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर नए वर्ष का स्वागत विरोध स्वरूप किया।

किसानों का कहना है कि जिले में लंबे समय से बिजली, पानी, खाद और बीज जैसी बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं। समय पर बिजली नहीं मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं, सिंचाई व्यवस्था चरमराई हुई है, खाद-बीज की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा।

आंदोलनरत किसानों का आरोप है कि एक ओर सरकार कृषि वर्ष मनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर अन्नदाता को सड़क पर बैठने और भूखा रहने को मजबूर किया जा रहा है। किसानों ने यह भी कहा कि शासन-प्रशासन और सत्ताधारी दल जश्न और कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जबकि किसान अपने हक के लिए संघर्ष कर रहा है।

भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। भूख हड़ताल में शामिल किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ने लगी है।

फिलहाल डिण्डौरी में किसानों का यह आंदोलन कृषि वर्ष 2026 की घोषणाओं पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन किसानों की मांगों पर कब और क्या कदम उठाता है।

गौरतलब है कि भारतीय किसान संघ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का अनुसांगिक संगठन है वहीं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होते हुए भी इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है जिससे किसानों में रोष व्याप्त है।

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