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खुड़िया स्कूल टोला ग्रामीणों ने चरनौई भूमि से अतिक्रमण हटाने की उठाईं आवाज 

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पटवारी ने मौके की निरक्षण कर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की ग्रामीणों को दी आश्वास

 

 

बलराम राजपूत न्यूज डिण्डौरी

 

जिले के तहसील समनापुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत प्रेमपुर के ग्राम खुड़िया स्कूल टोला का मामला सामने आया हैं, ग्रामीणों के जानकारी अनुसार गांव के गौचर गौठान चरनौई भूमि को गांव के कुछ दबंगों के व्दारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया हैं, जिससे परेशान होकर गांव के कुछ ग्रामीणों ने चरनौई भूमि से अतिक्रमण हटाने की आवाज उठाई और हल्का पटवारी से चरनौई भूमि से अतिक्रमण हटाने की बात रखें ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी अनुसार हल्का पटवारी दिन शनिवार को मौका स्थल पर पहुंच कर राजस्व रिकार्ड अनुसार मौके का चिन्हांकन कर पंचनामा तैयार कर कागजी कार्रवाई उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दी गई हैं

 

 

, जबकि प्रदेश सरकार के नियमानुसार प्रत्येक गांव में दो प्रतिशत भूमि चरनोई के नाम पर छोड़ी गई हैं। परंतु किसी भी गांव में चरनोई भूमि उपलब्ध नहीं हैं। क्योंकि अधिकांश भूमि में अतिक्रमण किया जा चुका हैं, पशुपालकों को मवेशी चराने के लिए जगह ही नहीं बची हैं, चरनोई भूमि के साथ नदी नाले तक में अतिक्रमण हो चुके हैं, जिससे मवेशियों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा हैं, कुछ जगह तो नाले तक गायब हो गए हैं, इसके साथ ही नदी की चौड़ाई तक कम कर दी गई हैं। आधे नदी में अतिक्रमण कारियों द्वारा खेती की जा रही हैं, इस वजह से पशुपालन से किसानों का मोहभंग होते जा रहा हैं, जबकि शासन द्वारा कृषकों को पशुपालन में प्रोत्साहन स्वारूप 25% तक का अनुदान देने का प्रावधान रखा गया हैं, जिस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अपने हर मंच से इस महत्वपूर्ण योजना का ऐलान किया जा रहा हैं, नदी, नाले एवं चरनोई भूमि अतिक्रमण मुक्त होने से किसानों को पशुपालन की ओर लौटने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं ,जिससे क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन एवं जैविक खेती को भी बल मिलेगा, ऐसे भी शासकीय भूमि का बंदरबांट किया जा रहा हैं, शासकीय भूमि का बटांकन कर निजी नामों में दर्ज कर दिया गया हैं, साथ ही रकवा भी बढ़ा दिया गया हैं, अब नए पटवारी सीमांकन करवाने जाएंगे तो स्वाभाविक विवाद, लड़ाई, झगड़ा एवं मारपीट होगा ही, जिससे किसानों की समस्या दिनों दिन बढ़ते ही जा रही हैं, किसानों की समस्या के निराकरण तभी होगा जब चरनोई भूमि के साथ शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त हो जाये ,

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