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विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालय में रैली निकालकर बांध पर रोक लगाने और ग्राम सभाओं के अधिकारों की मांगों का नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन 

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मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन ज्ञापन सौंपकर किये निम्न मांग 

बलराम राजपूत न्यूज डिंडौरी

रोजगार, मजदूरों के मानदेय, ग्रामसभा की स्वायत्तता, वनाधिकार तथा बांध परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर रैली और प्रदर्शन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की। मोर्चा की ओर से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर डिंडौरी को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों पर शीघ्र कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

 

ज्ञापन में कहा गया हैं ,कि रोजगार से जुड़े विभिन्न वर्गों की समस्याओं का निराकरण किया जाए। हटाए गए रसोई मित्र, पेसा मोबिलाइजर और संविदा प्रेरक शिक्षकों को तत्काल सेवाओं में वापस लेने की मांग की गई हैं। साथ ही रसोई मित्र, किसान मित्र, किसान दीदी, आउटसोर्स लाइनमैन, साझा चूल्हा रसोइयों और मनरेगा मेट को सम्मानजनक एवं नियमित वेतन दिए जाने की मांग उठाई गई।

मोर्चा ने ‘समान कार्य, समान वेतन’ की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की हैं। मध्यान्ह भोजन के बिलों का समय पर भुगतान करने तथा स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से बिना पारिश्रमिक काम कराने की व्यवस्था बंद करने की मांग ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल है।

बांध परियोजनाओं की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग

ज्ञापन में डिंडौरी तथा सीमावर्ती जिलों से जुड़ी बांध परियोजनाओं को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। मोर्चा ने आरोप लगाया कि बांध परियोजनाओं के निर्माण में कुछ प्रक्रियाएं नियमों के विपरीत संचालित की जा रही हैं। ऐसी प्रक्रियाओं को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई।

 

साथ ही कहा गया कि बांध प्रभावित ग्रामसभाओं में पर्याप्त सूचना और परामर्श के बिना किसी भी बांध परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाए। परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों और ग्रामसभाओं की सहमति एवं सहभागिता को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।

 

पंचायत प्रतिनिधियों पर दर्ज प्रकरण समाप्त करने की मांग

ज्ञापन में अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर रहे पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण मुखियाओं पर लगाए गए प्रतिबंध एवं प्रकरण समाप्त करने की मांग भी की गई है। मोर्चा ने पेसा और वनाधिकार कानूनों का उनकी मूल भावना और प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की।

वन विभाग द्वारा किसानों की फसलों की चराई से संबंधित मामलों में सख्त पुलिस कार्रवाई किए जाने की मांग भी रखी गई है। वहीं वनाधिकार से जुड़े सभी दावों का तीन माह के भीतर पारदर्शी तरीके से निराकरण करने की मांग की गई है।

 

हितग्राही चयन और निर्माण में ग्रामसभा के निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता

 

ज्ञापन में हितग्राही चयन, निर्माण कार्य और भुगतान से जुड़े मामलों में ग्रामसभा के निर्णयों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके अलावा ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायतों को स्वतंत्र एवं स्वायत्त रूप से कार्य करने देने की बात भी कही गई है।

मोर्चा की ओर से कहा गया कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों से जुड़े फैसलों में ग्रामसभा की भूमिका मजबूत किए जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की गई है।

 

ज्ञापन सौंपने के दौरान डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम, इंद्रपाल मरकाम, अनिल पनरिया, महेंद्र परस्ते, फूलसिंह टेकाम, नागेन्द्र धुर्वे, महेंद्र सिंह ठाकुर, रायसिंह मरकाम, रामसिंह मरावी,तोकसिहं मरावी, फूल सिंह मरकाम सहित रचनात्मक कांग्रेस मध्यप्रदेश, ओबीसी महासभा रसौइया संघ डिंडौरी, बैगाचक संघर्ष मोर्चा, बांध निर्माण विरोध संघर्ष मोर्चा और जयस सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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