धान की फसल में कीट प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने गठित किया निरीक्षण दल
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किसानों के खेतों का निरीक्षण कर कीट नियंत्रण के लिए दी जाएगी तकनीकी सलाह
बलराम राजपूत न्यूज डिंडौरी, 18 सितंबर 2026
जिले के कोकोमट्टा, बिलासर, पहरिया, धनौली, धनुआसागर सहित अन्य ग्रामों में धान की फसल में व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर, ब्राउन प्लांट हॉपर एवं अन्य रस चूसक कीटों के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा निरीक्षण दल का गठन किया गया है। दल को प्रभावित क्षेत्रों में खेतों का निरीक्षण कर कीट प्रकोप की स्थिति का आकलन करने तथा नियंत्रण के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह देने के निर्देश दिए गए हैं। जनप्रतिनिधियों द्वारा भी धान की फसल में बढ़ते कीट प्रकोप के संबंध में चिंता व्यक्त की गई है।
कृषि विभाग ने बताया कि रस चूसक कीट धान के पौधों के तने एवं पत्तियों से रस चूसकर पौधों की बढ़वार को प्रभावित करते हैं। अधिक प्रकोप की स्थिति में पौधे पीले पड़ने लगते हैं, पत्तियां सूख सकती हैं तथा प्रभावित स्थानों पर फसल झुलसी हुई दिखाई दे सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में नियमित रूप से पौधों के निचले तने एवं पत्तियों के बीच कीटों की निगरानी करें। अनावश्यक रूप से नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अधिक प्रयोग न करें तथा खेत में अत्यधिक पानी भरकर न रखें। कीटों की सही पहचान एवं आर्थिक क्षति स्तर से अधिक प्रकोप होने पर ही कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसा के अनुसार पंजीकृत कीटनाशकों का उपयोग करें।
वर्तमान में धान की फसल में व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है, जिससे कुछ स्थानों पर फसल पीली पड़कर सूखने की स्थिति में है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को कीट प्रकोप की नियमित निगरानी करने तथा रोग एवं कीट की सही पहचान के बाद ही नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। रासायनिक नियंत्रण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र अथवा कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार निम्न में से किसी एक कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है। दवा की अनुशंसित मात्रा 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ उपयोग करने की जानकारी दी गई है।
अनुशंसित कीटनाशक एवं मात्रा
इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल – 60 मिली प्रति एकड़।
थायोमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी – 80 ग्राम प्रति एकड़।
पाइमेट्रोजिन 50% डब्ल्यूजी – 120 ग्राम प्रति एकड़।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि खेत में किसी भी प्रकार के रोग अथवा कीट का असामान्य प्रकोप दिखाई देने पर उसकी फोटो सहित जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को दें, ताकि समय पर उचित तकनीकी सलाह प्राप्त की जा सके।
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