डिंडौरी-बिछिया प्रधानमंत्री सड़क बनते ही जर्जर, थगड़ा पट्टी से नहीं चलती गाड़ी – करोड़ों खर्च के बाद भी ग्रामीण प्रताड़ित
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जिम्मेदारी से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने मोड़ा मुंह, SH-43 पर आवागमन हुआ दूभर
बलराम राजपूत न्यूज डिण्डौरी
डिंडौरी से बिछिया प्रधानमंत्री सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सड़क बनी है, लेकिन बनते ही जर्जर हो चुकी है। वहीं सरकार गांव-गांव विकास के लाख दावे कर रही है। करोड़ों की राशि खर्च होने के बाद भी सड़क की बदहाली सरकार के दावों की पोल खोल रही है। सड़क की स्थिति को स्पष्ट देखा जा सकता है, धरातल की हकीकत जस की तस है। सड़क के नाम पर सिर्फ औपचारिकता का खेल खेला जा रहा है, जिसका खामियाजा सीधे स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है — आखिर करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़कें समय से पहले ही जर्जर क्यों हो जाती हैं? ग्रामीणों को मिलने वाला लाभ आखिर मिल क्यों नहीं पाता?
SH-43 का बुरा हाल, समनापुर से कमकोमोहनिया परसा टोला तक सड़क बदहाल
ताजा मामला डिंडौरी जिले के समनापुर ब्लॉक का है। यहां SH-43 पर समनापुर से बिछिया की ओर जाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क बनते ही उखड़ गई है।
समनापुर से भानपुर और भानपुर से कमकोमोहनिया, परसा टोला तक पूरी सड़क की हालत दयनीय है। थगड़ा पट्टी पूरी तरह से उखड़ चुकी है, गिट्टियां बाहर निकल आई हैं, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। मरम्मत के नाम पर पिछले कई दिनों से सिर्फ नाटक चल रहा है, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ। उल्टा दिन-ब-दिन हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। आलम यह है कि गाड़ी चलाना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
रोजमर्रा की जिंदगी बनी चुनौती
यह सड़क समनापुर, भानपुर, कमकोमोहनिया और परसा टोला के हजारों ग्रामीणों की मुख्य संपर्क सड़क है। प्रतिदिन ग्रामीणों को इसी मार्ग से समनापुर और भानपुर आना-जाना पड़ता है। छात्र, किसान, मजदूर और मरीज सभी को जान जोखिम में डालकर इसी जर्जर सड़क से गुजरना पड़ रहा है। यह सड़क अब हादसों को खुला न्योता दे रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री सड़क निर्माण में गुणवत्ता की खुलेआम अनदेखी की गई है। घटिया निर्माण के कारण ही सड़क कुछ महीनों में ही टूट गई।
शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
समाजसेवियों और ग्रामीणों द्वारा कई बार जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन ने जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ रखा है। कोई सुनने को तैयार नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि जब करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई सड़क कुछ महीनों में ही जर्जर हो जाए, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? ठेकेदार की, इंजीनियर की या फिर उन जनप्रतिनिधियों की जो विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं?
ग्रामीणों ने कलेक्टर डिंडौरी से मांग की है कि SH-43 समनापुर-बिछिया मार्ग की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और सड़क का शीघ्र पुनर्निर्माण कराया जाए।
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