नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 82248 35016 , हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , भुरखाटोला में जान जोखिम में पढ़ाई, छत से निकली सरिया, जर्जर हुआ स्कूल भवन – नर्मदा इंडिया एक्सप्रेस

भुरखाटोला में जान जोखिम में पढ़ाई, छत से निकली सरिया, जर्जर हुआ स्कूल भवन

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

18 बच्चों पर 2 शिक्षक, फिर भी सुविधा शून्य; मीनू की जगह सिर्फ दाल-चावल

 

 

बलराम राजपूत न्यूज डिण्डौरी

 

जिले के जनपद शिक्षा केन्द्र अमरपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झरना घुघरी के वन ग्राम भुरखाटोला झरना में स्थित नवीन प्राथमिक शाला की हालत देखकर शिक्षा विभाग के तमाम दावों की पोल खुल जाती हैं।

 

स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता हैं , कि क्लासरूम की छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ गया हैं और लोहे की सरिया बाहर निकल आई हैं। खिड़की-दरवाजे टूटे-फूटे हैं, छत जर्जर है। कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई हैं।

 

जानकारी के अनुसार इस शाला की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी और भवन का निर्माण सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2006-07 में 2.90 लाख रुपये की लागत से पालक शिक्षक संघ द्वारा कराया गया था, जो महज 18 साल में ही खंडहर में तब्दील हो गया हैं।

 

शाला में 18 छात्र और दो शिक्षक पदस्थ

oplus_132096

 

 

नवीन प्राथमिक शाला में कुल दर्ज संख्या 18 हैं। यहां तेजसिंह मरावी और कुंवारियां मरावी दो शिक्षक पदस्थ हैं। रिश्ते में दोनों पति-पत्नी हैं। शिक्षक अपनी तरफ से बच्चों को पूरी मेहनत से पढ़ा रहे हैं, बच्चों के रहन-सहन और संस्कार से उनकी मेहनत साफ दिखती भी है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में सब बेकार है। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा जर्जर भवन में चल रही हैं, उनका भविष्य खतरे से खाली नहीं है। शिक्षकों ने बताया कि भवन की जर्जर हालत की जानकारी कई बार विभाग को दी जा चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई व्यवस्था नहीं हुई। भवन के नीचे बच्चों को बैठाने में हमेशा भय बना रहता है।

 

मीनू के नाम पर सिर्फ दाल-चावल, लकड़ी पर बन रहा खाना

 

oplus_132096

 

शाला में मध्यान्ह भोजन में भी भारी अनियमितता सामने आई है। शासन के नियमानुसार बच्चों को तय मीनू के अनुसार भोजन मिलना चाहिए, लेकिन यहां रोजाना सिर्फ दाल-चावल परोसा जा रहा हैं। ग्रामीणों का आरोप हैं , कि भोजन आज भी लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा हैं, जबकि शासन द्वारा गैस कनेक्शन और गैस से भोजन बनाने के लिए राशि दी जाती हैं। जिम्मेदार विभागीय अफसरों के पास समय का अभाव बना रहता हैं, कभी भ्रमण करते भी हैं या नहीं, या जानबूझकर शासकीय मापदंड का पालन कराने में उदासीनता दिखा रहे हैं।

 

ना पेयजल, ना सड़क

 

oplus_132096

 

भुरखाटोला झरना में शिक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है। ग्रामीणों को आज भी पीने के पानी और गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नसीब नहीं है। ग्रामीणों ने सड़क और पीने के पानी को लेकर शासन-प्रशासन से अनेकों बार गुहार लगाई हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार से लेकर सड़क जाम और धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिल रहा हैं।

 

सवाल यह हैं ,कि जब भवन इतना जर्जर हैं ,तो विभाग किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी बच्चे के साथ अनहोनी के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? मामले को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी अमरपुर से मोबाइल पर संपर्क किया गया, फोन ना उठाने से बाकी जानकारी नहीं मिल सकी।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now